Get the latest news on your mobile!
Download: Youth Darpan App
Economy With Uttam Hindu News Source

प्रधानमंत्री की तार्किक बातें, आर्थिक मोर्चे पर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय अर्थव्यवस्था में सुस्ती को लेकर प्रतिपक्ष एवं अपनी पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा लगाए गए आरोपों का जिस तरह से एक के बाद एक उत्तर दिया है, उसके बाद उन सभी लोगों को अवश्य ही यह समझ जाना चाहिए कि केंद्र की भाजपा सरकार मोदी नेतृत्व में जो भी निर्णय ले रही है, वह देश को स्थायी शक्ति सम्पन्न एवं अर्थ व्यवस्था की दृष्टि से मजबूत बनाने वाले ही हैं। सच यही है कि केंद्र में मोदी सरकार अपने कार्यकाल के पहले दिन से ही राष्ट्र को हर मोर्चे पर ताकतवर बनाने की दिशा में स्थायी कार्य कर रही है। आज विपक्ष जो केंद्र पर सबसे बड़ा आरोप लगा रहा है, वह यह है कि देश की अर्थव्यवस्था पटरी से नीचे उतर गई है, जिसके कारण से रोजगार के अवसर कम हुए हैं। जीडीपी का बुरा हाल है। महंगाई चरम पर है। इस बार इन सभी आरोपों के उत्तर प्रधानमंत्री ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के सहारे देकर अपने आलोचकों को बिन्दुवार जवाब देने का प्रयास किया है। इस प्रस्तुतिकरण में प्रधानमंत्री मोदी ने कई पैरामीटर्स का जिक्र किया है, जिससे कि वर्तमान में देश की अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति, सरकार की निर्णय शक्ति और विकास की दिशा और गति को साक्ष्य सहित समझाया जा सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आलोचकों से प्रश्न किया है कि क्या ऐसा पहली बार हुआ है जब देश के जीडीपी की वृद्धि किसी तिमाही में 5.7 प्रतिशत पर पहुंची है?  पिछली सरकार में छह साल में आठ बार ऐसे अवसर आए, जब विकास दर 5.7 प्रतिशत या उससे नीचे गिरी थी। इतना ही नहीं तो देश की अर्थव्यवस्था ने ऐसी तिमाही भी देखी हैं जब विकास दर 0.2 प्रतिशत और 1.5 प्रतिशत थी और उस समय भारत की मुद्रास्फीति और चालू खाते का घाटा भी अधिक था। पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के कार्यकाल में अर्थव्यवस्था की स्थिति इतनी नाजुक हो गई थी कि भारत को फ्रेजाइल फाइव ग्रुप का सदस्य कहा जाने लगा था। उस समय बड़े-बड़े अर्थशास्त्रियों के रहते ऐसा कैसे हो गया? हमारे देश में जीडीपी से ज्यादा महंगाई की दर थी और बढ़ते राजकोषीय घाटे तथा बेकाबू चालू खाते के घाटे पर ही चर्चा होती थी।

प्रधानमंत्री ने यूपीए और एनडीए सरकार के तीन साल के कार्यकाल की कुछ इस तरह से तुलना प्रस्तुत की कि उसे पढ़ लेने के बाद कोई यह नहीं कह सकता कि इस सरकार में देश आर्थिक सुधारों की ओर अग्रसर न होकर एक पल के लिए भी अर्थ की कमजोर स्थिति में आया दिखाई दिया हो। तुलनात्मक रूप से देखें तो पिछली सरकार के आखिरी तीन साल में गांवों में 80 हजार किलोमीटर सड़क बनी थी और वर्तमान सरकार ने तीन साल में 1 लाख 20 हजार किलोमीटर सड़क बनाई है। यानी 50 प्रतिशत से ज्यादा ग्रामीण सड़कों का निर्माण हुआ है। पिछली सरकार ने आखिरी के तीन साल में 15 हजार किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने का काम किया, जबकि भाजपा सरकार ने अपने तीन साल के कार्यकाल में 34 हजार किलोमीटर से ज्यादा राष्ट्रीय राजमार्ग बनवाया है।

इसी तरह रेलवे सेक्टर में पिछली सरकार के आखिरी तीन वर्षों में लगभग 1100 किलोमीटर नई रेललाइन का निर्माण हुआ था और भाजपा शासन में 2100 किलोमीटर से ज्यादा तक पहुंच गए। वहीं इतने समय में पिछली सरकार ने 1300 किलोमीटर रेललाइनों का दोहरीकरण किया तो मोदी सरकार में 2600 किलोमीटर रेललाइन का दोहरीकरण किया गया है। पिछली सरकार ने आखिरी के तीन वर्षों में 1 लाख 49 हजार करोड़ का पूंजीगत व्यय किया था तो इतने ही वर्षों में लगभग 2 लाख 64 हजार करोड़ रुपए का पूंजीगत व्यय एनडीए के कार्यकाल में संभव हुआ है। नवीकरणीय ऊर्जा, सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में पिछली सरकार के बीते तीन वर्षों के कुल कार्यकाल में 12 हजार मेगावॉट की नई क्षमता जोडऩे के स्थान पर आज  इतने ही समय में 22 हजार मेगावॉट से ज्यादा ऊर्जा की नई क्षमता को ग्रिड पावर से जोडऩे में मोदी सरकार सफल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि देश में विमुद्रीकरण के बाद सकल घरेलू उत्पाद अनुपात नकद में नौ प्रतिशत आ गया है, जबकि यह पहले 12 प्रतिशत था । 10 प्रतिशत से ज्यादा की मुद्रास्फीति कम होकर अब इस साल औसतन 2.5 प्रतिशत पर आ गई है। केंद्र सरकार अपना राजकोषीय घाटा पिछली सरकार के 4.5 प्रतिशत से घटाकर 3.5 प्रतिशत पर ले आई है। भारत का विदेशी मुद्रा भण्डार आज 40 हजार करोड़ डॉलर के पार पहुंच गया है। रिजर्व बैंक का अनुमान है कि अगली तिमाही के जो आने वाले आंकड़े हैं, उसमें जीडीपी ग्रोथ 7.7 तक होने की संभावना है ।

आंकड़ों को देखें तो कोयला, बिजली, स्टील और प्राकृतिक गैस से प्राप्त आय में भी काफी अच्छी वृद्धि दर्ज की जा रही है। देश में लोन के क्षेत्र में ग्रोथ देखने योग्य है। कैपिटल मार्केट, म्युचुअल फंड और बीमा क्षेत्र आज तेजी से प्रगति पथ पर हंै। कंपनियों ने आईपीओ के द्वारा इस साल पहले 6 महीने में ही 25 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि मोबलाइज की है। गैर वित्तीय संस्थान में कॉरपोरेट बॉन्ड और निजी नियुक्तियों  द्वारा सिर्फ चार महीने में ही 45 हजार करोड़ रुपयों का निवेश किया जा चुका है। मोदी कहते हैं कि ये सारे आंकड़े देश की मजबूत आर्थिक स्थिति को दर्शाते हैं । इस सरकार ने समय और संसाधन दोनों के द्वारा उसके सही इस्तेमाल पर लगातार जोर दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने जिस एक बात पर विशेष ध्यान दिलाया है, वह है, हमें देश में निराशा का माहौल पैदा करने से बचना चाहिए, इस वक्त देश आर्थिक विकास की ओर अग्रसर है, जिसमें हमें चाहिए कि देश के आम नागरिक होने के नाते हम अपने प्रधानमंत्री को इस रास्ते पर चलने के लिए और अधिक प्रोत्साहित करें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक मोर्चे पर कही सभी तार्किक बातों को समझकर यदि हम सभी व्यवहार करेंगे तो निश्चित मानिए वह दिन भी अतिशीघ्र आएगा, जब देश विकासशील देशों की सूची से बाहर निकलकर विकसित देशों की श्रेणी में आ खड़ा होगा।

डॉ. मयंक चतुर्वेदी , लेखक