भारतीय सेना में पुरुषों और महिला ऑफिसरों की भूमिका: भारतीय सेना दिवस 2019

भारतीय सेना आज अपना 71वां आर्मी डे मना रही है!

इस वर्ष प्रमुख बात यह है कि आर्मी परेड 2019 का नेतृत्व एक महिला अफसर “लेफ्टिनेंट भावना कस्तूरी” करेंगी। इतिहास में ऐसा पहली बार दिखेगा जब आर्मी चीफ “बिपिन रावत” एक महिला अफसर से सलामी लेंगे।।

हमारे देश की सीमाओं की रक्षा हेतु तथा अपने प्राणों की आहूति देने वाले वीर जवानों-सपूतों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करने का दिन 15 जनवरी है। भारतीय सेना आज अपना 71वां आर्मी डे मना रही है, वस्तुत: भारतीय सेना एक ऐसी सम्मानित संस्था है जो राष्ट्रीय मानकों, मूल्यों, परंपराओं और संस्कारों को बरकरार रखने में गर्वान्वित महसूस करती है। इसलिए आज का यह दिन मुख्य रूप से देश की एकता व अखंडता के प्रति संकल्प लेने का प्रमुख दिन है। ऐतिहासिक दृष्टिकोण से, इस दिन “के. एम. करिअप्पा” को भारतीय सेना का ‘कमांडर-इन-चीफ़’ बनाया गया था। लेफ्टिनेंट करिअप्पा, लोकतांत्रिक भारत के पहले सेना प्रमुख बने थे, इससे पूर्व यह अधिकार ब्रिटिश मूल के ‘फ़्राँसिस बूचर’ के पास था।

भारतीय सेना हमेशा से मजबूत, सक्षम और एक सशक्त देश का बल रही है जिसने प्रभावी रूप से देश के राष्ट्र-हित की रक्षा की है। इतना ही नहीं, भारतीय सेना के जवान एक ओर तो व्यापक स्तर पर होने वाले युद्धों में शामिल होती है, तो वहीं दूसरी ओर “मानवीय सहायता” और “आपदा राहत” जैसे अहम कार्यों वो चुनौतियों में भी अग्रणी भूमिका निभाती है। अन्य शब्दों में, देश की आन, बान और शान भारतीय सेना विपरीत परिस्थियों में भी देश की सेवा करने में हमेशा मजबूती से तैयार रहती है। उदहारण के लिए, उत्तराखंड आपदा में भारतीय सेना द्वारा रेस्क्यू ऑपरेशन दुनिया में सबसे सफल और बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन माना जाता है।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने लिखा- “सेना दिवस के अवसर पर भारतीय सेना के सभी फौजी भाई-बहनों, युद्धवीरों और उनके परिवारों को बधाई। आप हमारे राष्ट्र के गौरव हैं और हमारी आजादी के रखवाले। सभी भारतवासी चैन की नींद सो सकते है, क्योंकि उन्हें भरोसा है कि आप हमेशा चौकन्ने और सतर्क रहते हैं — राष्ट्रपति कोविन्द।” वंही पीएम मोदी ने लिखा- “सेना दिवस के अवसर पर हमारे जवानों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं. हम सभी देशवासियों को अपने सैनिकों के दृढ़ संकल्प एवं समर्पण पर गर्व है. मैं उनके अदम्य साहस एवं वीरता को प्रणाम करता हूं।”

भारतीय सेना दुनिया में सबसे ऊंचाई पर स्थित सीमा की रक्षा करने वाली पहली सेना है। महत्वपूर्ण रूप से, हमारी सेना को विश्व की सबसे बड़ी “वॉलंटियर मिलिट्री” का दर्जा भी हांसिल है। इनके नाम विश्व की सबसे ऊंची जगह पर पुल (ब्रिज) बनाने का रिकॉर्ड भी दर्ज है। इस पुल का नाम “बेली ब्रिज” है जो हिमालय की चोटी पर 18 हजार 379 फीट की ऊंचाई पर बनाया गया है और 98 फीट लंबा ये ब्रिज द्रास और सुरू नदी के बीच बनाया गया है। भारतीय सेना का “हाई आल्टीटयूट वारफेयर स्कूल” (HAWS) दुनिया का सबसे बेहतरीन आर्मी ट्रेनिंग सेंटर माना जाता है।

हालाँकि, 1948 में भारतीय सेना में लगभग ‘दो लाख’ सैनिक ही थे, लेकिन सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब इसकी संख्यां लगभग ‎1,443,921 को पार कर चुकी है। फ़ोर्स वो टेरीटोरियल आर्मी मिलाकर इसकी संख्या लगभग 4,207,250 से भी अधिक होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसके अलावे, आर्मी के बेड़े में सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, ब्रह्मोस, अग्नि, पृथ्वी, आकाश, हजारों ‘आर्मी टैंक्स’ और ‘एयरक्राफ्ट’ के साथ-2 शक्तिशाली न्यूक्लियर हथियार और मिसाइल्स भी शामिल है जो देश के समक्ष आने वाली विभिन्न चुनौतियों से निपटने के लिये तैयार और प्रतिबद्ध है।

वर्तमान में, भारतीय सेना को और मजबूत बनाने हेतु उन्हें “दो हाईटेक तोपें” सौंप दी गई हैं। सेना को 32 वर्ष से इन तोपों का इंतजार था। ये तोपें हैं M-777 अल्ट्रालाइट होवित्जर (अमेरिकी) तोप और K-9 वज्र (कोरियन) बख्तरबंद तोप। वर्ष 2020 तक 100, K-9 वज्र आर्टीलरी तोप भारतीय सेना के पास होंगी। कुल 4,366 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट के तहत सेना को 10 तैयार तोपें मिली। शेष 90 का निर्माण ‘मेक इन इंडिया’ के तहत होगा। इसमें से 40 तोपें नवंबर 2019 में मिलेंगी। बाकी 50 तोपें नवंबर 2020 तक सेना को मिल जाएगी।

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अब भारतीय सेना की ताकत में और इजाफा होने जा रहा है, इसमें M-777 अल्ट्रालाइट होवित्जर तोप को जोड़ा गया। यह प्रोजेक्ट 5000 करोड़ रुपये का है। इसका वजन केवल 4.2 टन है, इसलिए इसे चीनूक हेलीकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट विमान से हाई एल्टीटयूट और दूसरे दुर्गम पहाड़ी एरिया में भी तैनात किया जा सकता है। कारगिल युद्ध के बाद सबसे ज्यादा कमी हाई एल्टीट्यूट वारफेयर की थी। वर्ष 2021 तक सेना को पूरी 145 M-777 तोपें मिल जाएंगी। और अगस्त 2019 की शुरुआत में पांच तोपें सेना को सौंप दी जाएंगी। जबकि यह प्रक्रिया पूर्ण होने में लगभग 24 महीनों का वक्त लगेगा।

अतः 9 नवंबर, 2018 को ही महाराष्ट्र के देवलाली में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत इन तोपों को आधिकारिक तौर पर सेना में शामिल किये। ऐसा माना जाता है कि इनको भारत-पाकिस्तान और चीन की सरहद पर तैनात किया जाएगा उपरोक्त को अत्यधिक ऊंचाई से लेकर रेगिस्तान या फिर पहाड़ से लेकर बर्फीले पहाड़ों पर तैनात किया जा सकता है। इससे भारतीय सेना की आर्टीलरी क्षमता और सरहद (सीमा) की सुरक्षा मजबूत होगी।।

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अब देश की रक्षा में जितना पुरुष सक्षम हैं, उतनी ही महिलाएं भी। भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना में शामिल होकर महिलाओं ने अपने हुनर, साहस और पराक्रम का परचम सम्पूर्ण विश्व के समक्ष दिखा रही हैं। किसी महिला ने अकेले फाइटर जेट उड़ाकर देश-दुनिया को अपनी प्रतिभा से रूबरू कराया है, तो कोई शूटिंग के जरिए सुर्खियों में छाई रही हैं।

सेना दिवस 2019 के अवसर पर कुछ महिला ऑफिसर्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने अपने पराक्रम और हुनर से इतिहास रचा है:

  1. गुंजन सक्सेना को आईएएफ के इतिहास में करगिल गर्ल के रूप में जानी जाती हैं। कलगिल युद्ध के दौरान वह पहली महिला थीं, जिन्हें वहां महिला हेलीकॉप्टर पायलट के रूप में तैनात किया गया था;
  2. अवनि चतुर्वेदी भारत की पहली महिला लड़ाकू पायलटों में से एक है! वह मध्य प्रदेश के रीवा जिले से है। अवनी के साथ मोहना सिंह और भावना कंठ के साथ पहली बार लड़ाकू पायलट घोषित किया गया था। इन तीनों को जून, 2016 में भारतीय वायु सेना के लड़ाकू स्क्वाड्रन में शामिल किया गया। उन्हें औपचारिक रूप से तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर द्वारा कमीशन में शामिल किया गया था;
  3. पद्मवती बंदोपाध्याय 2002 में भारतीय सेना की पहली महिला एयर मार्शल बनी थी। यही नहीं उनका नाम देश की तीनों सेनाओं में स्टार रैंक पाने वाली दूसरी महिला के नाम में शामिल हैं;
  4. पुनीता अरोड़ा भारत की पहली महिला है जिन्होंने भारतीय सशस्त्र बल की दूसरी सबसे ऊंची रैंक लेफ्टिनेंट जनरल का पद संभाला। वे भारतीय नौसेना की पहली महिला वाइस एडमिरल भी थीं;
  5. कैप्टन शिखा सुरभी बाइक पर स्टंट करती दिखेंगी। वो पहली ऐसी महिला ऑफिसर हैं जो आर्मी की डेयरडेविल्स टीम में जगह बना पाई हैं;
  6. कैप्टन भावना स्याल ट्रांसपोर्टेबल सैटेलाइट टर्मिनल के साथ आर्मी परेड 2019 पर भारतीय सेना की ताकत दिखाएंगी।।

युथ दर्पण, त्रिलोक सिंह, हमारे देश के वीर जवानों को सेना दिवस 2019 के अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं और प्यार।

अतः भारतीय सेना दिवस 2019 के ऐतिहासिक अवसर पर पहली बार महिला ऑफिसर लेफ्टिनेंट भावना कस्तूरी पहली महिला ऑफिसर होंगी जोकि परेड 2019 में सेना की टुकड़ी का नेतृत्व करेंगी, जिसमें 144 पुरुष जवान भी शामिल होंगे। यह सैन्य टुकड़ी महिलाओं की उस टुकड़ी से अलग है जिसका नेतृत्व कैप्टन दिव्या अजिथ ने वर्ष 2015 में गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर की थीं। वंही कैप्टन भावना स्याल ट्रांसपोर्टेबल सैटेलाइट टर्मिनल के साथ परेड 2019 में भारतीय सेना की दक्षता और सामर्थ्य का परचम लहराने जा रही हैं, जो अपने आप में सम्पूर्ण भारतवर्ष के लिए गर्व की बात है। भारतीय सेना के अनुसार हर भारतीय इस बात पर गर्व करता है कि ‘भारतीय सेना शक्तिशाली, आधुनिक, सर्वश्रेष्ठ एवं उच्च मनोबल के साथ सदैव तैयार है।’ हमारा देश के प्रति दायित्व हमारे प्रेरणा का अजस्र स्रोत है।।

जय हिन्द!

लेखक: सौरभ कुमार सिंह, भारतीय सेना।

(आलेख में लेखक ने निजी विचार व्यक्त किये हैं।)

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