संघ की आखिरी पंक्ति में बैठा भाजपा का सबसे ताकतवर नेता

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अमित शाह अपनी पार्टी का सबसे ताकतवर नेता है। उनके सामने अच्छे बड़े नेता भी बैठने या टिकने से कतराते हैं। आज भाजपा का मतलब अमित शाह और अमित शाह का मतलब भाजपा माना जाता है। इससे आगे पीछे की सारी पंक्तियां शक्तिहीन दिखाई देती हैं, लेकिन वृंदावन में चल रही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की समन्वय बैठक में संघ और उसके अनुसांगिक संगठनों के पदाधिकारी इक_ा हुए हैं और इनकी बैठक में पीछे से तीसरी पंक्ति में भाजपा का यह सबसे ताकतवर नेता नजर आ रहा है। उनके साथ में भाजपा के महामंत्री रामलाल हैं।

संघ की तीन दिन की यह बैठक एक सितंबर को शुरू हुई। बैठक के दौरान संघ अपने घरेलू और बाहरी मुद्दों पर चर्चा करता है और कामकाज की समीक्षा करता है। अलग-अलग हिस्सों में और विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे कामकाज की रिपोर्ट ली जाती है। इस दौरान कामकाज में आ रही अड़चनों पर भी चर्चा होती है, तमाम समसामयिक विषयों पर रायशुमारी होती है। साथ ही सरकार और संगठन के बीच सामंजस्य पर भी बात होती है।

अमित शाह पार्टी अध्यक्ष के नाते और रामलाल पार्टी में महामंत्री के नाते इस बैठक में उपस्थित हुए। माना जा रहा है कि भाजपा के कुछ अन्य नेता भी इस बैठक में संघ के सामने तलब हो सकते हैं, लेकिन मूल जिम्मेदारी पार्टी के नेतृत्व की है। यही वजह है कि कैबिनेट विस्तार की तैयारियों और गुजरात और हिमाचल चुनाव की रणनीति पर अतिव्यस्त होते हुए भी अमित शाह को संघ की इस बैठक में उपस्थिति दर्ज करानी पड़ी। हालांकि यह उपस्थिति की एक बड़ी वजह कैबिनेट विस्तार भी है। मोदी मंत्रिमंडल को जिस तरह से अंतिम रूप दिया जा रहा है, उसपर संघ की मोहर लगे बिना गाड़ी आगे नहीं बढ़ सकती, इसीलिए अमित शाह को वहां पहुंचना पड़ा जहां संघ के शीर्ष नेतृत्व और चेहरे उपस्थित हैं।
बताया जाता है कि अमित शाह अपनी सूची लेकर भी पहुंचे हैं और उन्हें संघ के प्रश्नों वाली सूची पर नेतृत्व को जवाब भी देना है और आगे की तैयारियों के लिए दिशा निर्देश भी लेने हैं। अमित शाह अच्छे से समझते हैं कि जमीन पर जिस प्रतिबद्धता और तैयारी के साथ संघ उनकी ताकत बनता है, वैसा भाजपा के कार्यकर्ता भी नहीं कर सकते। यही कारण है कि अमित शाह इतने शक्तिशाली होते हुए भी संघ के आगे शीश नवाते ही हैं।

मंत्रिमंडल में बदल रहे चेहरों से लेकर उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में पैदा हुई ताज़ा स्थितियों और जटिलताओं पर भी अमित शाह को संघ की क्लास में उपस्थित रहना है और पाठ याद करने हैं। उन्हें इस समय पार्टी की छवि और आगामी चुनाव पर भी ध्यान देना था। उन्हें तैयारी करनी थी आर्थिक मोर्चे पर घिरी सरकार को लोगों के बीच संभालने की, लेकिन इन सबके लिए संघ की संस्तुति भी चाहिए।

हालांकि पार्टी से अलग हो चुके कुछ वरिष्ठ लगातार पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठाते रहे हैं और पार्टी में आत्मावलोकन की कमी और लोकतंत्र के अभाव की चिंता व्यक्त करते रहे हैं, लेकिन संघ की बैठक में अनुशासन ऐसी तमाम ताकतों को दरकिनार कर बड़े से बड़े नेता को एक स्वयंसेवक तक सीमित कर देता है। ऐसा उदाहरण वामदलों के अलावा किसी और राजनीतिक पार्टी में अब देखने को नहीं मिलता।