डेरा सच्चा सौदा मुखी गुरमीत को सीबीआई कोर्ट द्वारा दुष्कर्म का दोषी करार देने के बाद फैली हिंसा के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सख्त रुख अपनाया है।हालांकि हिंसा के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने नई दिल्ली में अमित शाह और प्रधानमंत्री से मुलाकात कर पूरी स्थिति का स्पष्ट कर दिया था और खुद आश्वस्त होकर लौटे हैं।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राम रहीम को दोषी करार देने के बाद राज्य में भड़की हिंसा को न रोक पाने के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के कामकाज पर अब खुद प्रधानमंत्री कार्यालय कड़ी निगाह रख रहा है। सूत्रों की मानें तो बातचीत के दौरान सरकार की दलीलें आश्वस्त नहीं कर पाईं और इसके बाद पीएमओ ने खट्टर सरकार के कामकाज की निगरानी रखने की ज़रुरत समझी है।

खट्टर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे और मामले से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि विभिन्न एजेंसियों के इंटेलिजेंस इनपुट्स राज्य की पुलिस के पास थे, लेकिन ऐसा लगा कि वह उन बातों को गंभीरता से नहीं ले रहे थे। इससे पहले भी राज्य सरकार तीन बार प्रदर्शनों को संभालने में नाकाम रही है जिसके बाद खट्टर प्रशासन पर अधिकारियों को संदेह है।
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014 में रामपाल के समर्थकों द्वारा किया गया उत्पात जिसमें 6 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद 2015 में हरियाणा में जाट आंदोलन में 30 लोग मारे गए थे और अब डेरा सच्चा सौदा के समर्थकों ने एक बार फिर कानून व्यवस्था की कलई खोल दी। इस बार तमाम इनपुट्स और अंदेशों को नजऱअंदाज करते हुए प्रशासन समर्थकों को इक_ा होने से नहीं रोक पाया। धारा 144 का पालन नहीं किया गया। हालात यहां तक बिगड़े की हरियाणा-पंजाब हाईकोर्ट के दखल के बाद सरकार की सुस्ती टूटी थी।