चैत्र नवरात्रि 2018

नवरात्रि हिन्दू धर्म में मनाए जाने वाले सबसे बड़े और महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है, जिसे पुरे भारत में समान श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। ऐसे तो पुरे साल भर में चार नवरात्रि आती है लेकिन मुख्य रूप से केवल दो को ही बड़े पैमाने पर मनाया जाता है – 1. शरद नवरात्रि 2. चैत्र नवरात्रि।

नौ दिनों तक चलने वाला यह पर्व देवी दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों को समर्पित है। माना जाता है जब दानवों ने देवताओं पर आक्रमण कर उनका राजपाठ छीन लिया था तो माता गौरी ने दुर्गा और अन्य नौ रूप धारण कर उन दैत्यों का संघार किया था। क्योंकि यह युद्ध नौ दिनों तक चला था इसीलिए इसे नवरात्रि कहा जाता है।

इन दिनों भक्त गण अपने घर माँ दुर्गा का दरबार लगाते है, कलश स्थापना करते है, पूजा आदि करते है। आठ दिनों की पूजा के बाद नौवे दिन कंजिकों को भोजन कराया जाता है जिसमे उन्हें हलवा, चना और पूरी का प्रसाद दिया जाता है। माना जाता है इस दिन घर आने वाली नौ कन्याएं देवी के नौ स्वरूपों के समान होती है और उनका सेवा सत्कार करने से माँ दुर्गा प्रसन्न होती है।

नवरात्रि कलश स्थापना :

कलश स्थापना के लिए आवश्यक सामग्री :-

  • जौ बोने के लिए मिटटी का पात्र
  • साफ़ मिट्टी
  • मिटटी का एक छोटा घडा
  • कलश को ढकने के लिए मिट्टी का एक ढक्कन
  • गंगा जल
  • सुपारी
  • 1 या 2 रूपए का सिक्का
  • आम की पत्तियां
  • अक्षत / कच्चे चावल
  • मोली / कलावा / रक्षा सूत्र
  • जौ (जवारे)
  • इत्र (वैकल्पिक)
  • फुल और फुल माला
  • नारियल
  • लाल कपडा / लाल चुन्नी
  • दूर्वा घास

बहुत से लोग इन दिनों उपवास भी रखते है। कुछ पहला और आखिरी उपवास रखने का प्रण लेते है तो कुछ पुरे नौ दिनों तक अन्न का सेवन नहीं करते। बहुत से लोग पुरे नौ दिन केवल फल आदि पर ही जीवित रहते है जबकि कुछ केवल नींबू पानी पीकर अपना दिन गुजारते है। लेकिन इस विषय पर किसी पर भी कोई पाबंदी नहीं है आप जैसे चाहे वैसे उपवास रख सकते है। क्योंकि सभी के रीती रिवाज और क्षमताएं एक दुसरे से भिन्न होती है। इसीलिए आप अपनी क्षमता के अनुसार ही उपवास रखें। यहाँ हम आपको चैत्र नवरात्रि 2018 के तारीख, तिथि, वार, देवी का पूजन और उससे जुडी कुछ विशेष जानकरियां दे रहे है। जो आपको नवरात्रि पूजन में सहायता करेगी।

चैत्र नवरात्रि 2018 की महत्वपूर्ण तिथियां –

नवरात्रि का दिन तारीख (वार) तिथि देवी का पूजन
नवरात्रि दिन 1 18 मार्च 2018 (रविवार)  प्रतिपदा  शैलपुत्री पूजा, कलश स्थापना
नवरात्रि दिन 2 19 मार्च 2018 (सोमवार)  द्वितीया  ब्रह्मचारिणी पूजा
नवरात्रि दिन 3  20 मार्च 2018 (मंगलवार)  तृतीया  चंद्रघंटा पूजा
नवरात्रि दिन 4 21 मार्च 2018 (बुधवार)  चतुर्थी  कुष्मांडा पूजा
नवरात्रि दिन 5 22 मार्च 2018 (गुरुवार)  पंचमी स्कंदमाता पूजा
नवरात्रि दिन 6 23 मार्च 2018 (शुक्रवार)  षष्ठी  कात्यायनी पूजा
नवरात्रि दिन 7 24 मार्च 2018 (शनिवार)  सप्तमी, अष्टमी  कालरात्रि पूजा, महागौरी पूजा
नवरात्रि दिन 8 25 मार्च 2018 (रविवार)  अष्टमी, नवमी  राम नवमी
नवरात्रि दिन 9 26 मार्च 2018 (सोमवार)  दशमी नवरात्रि पारण

नवरात्रि में कलश स्थापना कैसे करें?

नवरात्रि हिन्दुओं का पवित्र त्यौहार है जिसे पुरे भारत में समान उत्साह के साथ मनाया जाता है। दुर्गा के नौ स्वरूपों को समर्पित यह पर्व नौ दिनों तक मनाया जाता है जिसमे पहले दिन यानी प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापना की जाती है। जिसका इस पर्व में खास महत्व होता है। शास्त्रों में भी नवरात्रि के दौरान कलश स्थापना का खास महत्व बताया गया है। जिनके अनुसार कलश स्थापना (घटस्थापना) नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त और सही समय में करनी चाहिए। माना जाता है सही समय में की गयी कलश स्थापना से देवी शक्ति का आशीर्वाद मिलता है जबकि गलत समय में की गयी घटस्थापना का कोई लाभ नहीं मिलता।

बता दें अमावस्या और रात्रि के समय घटस्थापना करना निषेध होता है। कलश स्थापना के लिए सबसे शुभ समय प्रातःकाल का होता है जब पहले प्रहर में प्रतिपदा तिथि प्रबल हो। अगर ऐसा कोई मुहूर्त न मिले तो कलश स्थापना अभिजित मुहूर्त में भी की जा सकती है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के दौरान कलश स्थापना करना शुभ नहीं माना जाता लेकिन अगर आपकी रीती रिवाजों में इस दौरान पूजा होती है तो आप उस हिसाब से पूजन कर सकते है। यहाँ हम आपको नवरात्रि के दौरान कलश स्थापना की सही विधि बताने जा रहे है। इस मौके पर आप भी एक-दूसरे को इस पर्व की बधाई दें।

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