कल के दिन शिकागो में 1893 में स्वामी विवेकानंद ने विश्व धर्म सम्मेलन में ऐतिहासिक भाषण दिया था। उस भाषण की वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विज्ञान भवन में युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज 11 सितंबर है, विश्व को 2001 से पहले ये पता ही नहीं था कि 9/11 का महत्व क्या है, दोष दुनिया का नहीं था, दोष हमारा था कि हमने ही उसे भुला दिया था और अगर हम ना भुलाते तो 21वीं शताब्दी का 9/11 ना होता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जो लोग पान खाकर भारत मां पर पिचकारी मारते हैं और फिर वंदे मातरम बोलते हैं उन्हें वंदेमातरम बोलने का हक नहीं है।

मोदी ने स्वामी विवेकानंद को याद करते हुए कहा कि इसी दिन इस देश के एक नौजवान ने अपने भाषण से पूरी दुनिया को हिला दिया, गुलामी के 1000 साल के बाद भी उसके भीतर वो ज्वाला थी और विश्वास था कि भारत में वो सामथ्र्य है जो दुनिया को संदेश दे सके। उस भाषण से पहले लोगों को लेडिज एंड जेंटलमैन के अलावा कोई शब्द नहीं पता था, ब्रदर्स एंड सिस्टर्स के बाद 2 मिनट तक तालियां बजती रही थी, उस भाषण से पूरी दुनिया को उन्होंने अपना बना लिया था।
पीएम मोदी बोले कि विवेकानंद जी ने आइडिया को आइडिलिज्म में कनवर्ट किया। उन्होंने रामकृष्ण मिशन को जन्म दिया, लेकिन विवेकानंद मिशन को जन्म नहीं दिया। जब तेज आवाज में वंदे मातरम सुनो तो रौंगटे खड़े हो जाते हैं।

पीएम ने कहा, ‘कॉलेज में कितने डे मनाए जाते हैं, क्या पंजाब कॉलेज ने तय किया कि केरल डे मनाएंगे? उनकी तरह कपड़े पहनेंगे, खेल खेलेंगे? मैं रोज डे का विरोधी नहीं हूं। अगर आजादी के 75 साल मनाने हैं तो गांधी, भगतसिंह-सुखदेव, सुभाष चंद्र और विवेकानंद के सपनों का हिंदुस्तान नहीं बनाएंगे?: क्या कभी दुनिया में किसी ने सोचा है कि किसी लेक्चर के 125 वर्ष मनाए जाएं? 2022 में रामकृष्ण मिशन के 125 साल और आजादी के 75 साल होंगे, क्या हम कोई संकल्प ले सकते हैं?