परिपक्व भारत




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आजादी के 7 दशक बाद एक बार फिर सीमा पर चीनी दबाव बना हुआ है और चीन आए दिन भारत को धमकी पर धमकी देता चला जा रहा है। 1962 में चीन ने भारत को एक बड़ी शिकस्त दी थी। चीन आज भी उसी शिकस्त की याद भारत को दिलाकर भारत पर मानसिक दबाव बनाने का प्रयास कर रहा। पिछले दिनों उसने अपनी सेना के स्थापना दिवस पर भी सेना को किसी भी युद्ध के लिए तैयार रहने के लिए कहा।
उपरोक्त सब कुछ पिछले दो माह से डोकलाम, जोकि भूटान का हिस्सा है और जिसकी सुरक्षा की जिम्मेवारी भारत की है, क्षेत्र में सड़क बनाने को लेकर चीन इसे अपना क्षेत्र कह रहा है और भूटान, चीन के दावे को खारिज कर रहा है और डोकलाम क्षेत्र को अपना कहता है और इस समय यह उसके कब्जे में भी है।

चीन द्वारा दी जा रही धमकियों को देखते हुए भारत ने चीन के साथ लगती सीमाओं पर सेना को अलर्ट भी कर दिया है और सैनिकों की संख्या भी बढ़ा दी है। चीन द्वारा दी जा रही धमकियों का जवाब देते हुए भारतीय रक्षा मंत्री अरुण जेतली ने पिछले दिनों कहा था कि चीन को केवल 1962 ही नहीं याद रखना चाहिए। भारत ने 1965, 1971 और कारगिल संघर्ष भी किया है और भारत अब 1962 वाला भारत नहीं रह गया। इसी तरह विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी डोकलाम मसले को संवाद द्वारा हल करने की बात कही है। बात के लिए शर्त यह है कि चीन अपनी सेनाओं को पीछे हटाए तो भारत भी अपनी सेनाएं पीछे हटा लेगा।

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चीन ने संवाद की बात को किनारे करते हुए धमकी देने वाला सिलसिला ही जारी रखा है। भारत द्वारा अपनाई नीति को देखते हुए अमरीका के नेवल वॉर कालेज में प्रोफेसर जेम्स आर होम्स ने कहा है कि डोकलाम गतिरोध में भारत परिपक्व ताकत की तरह बर्ताव कर रहा है, जबकि चीन किसी बदमिजाज किशोर की तरह व्यवहार करता हुआ दिख रहा है। उन्होंने कहा, अब तक नई दिल्ली ने सही चीजें की हैं। न तो वह विवाद में पीठ दिखाकर भागा है और न ही उसने चीन की तरह बढ़-चढ़कर बयानबाजी की है। उन्होंने हैरानगी जाहिर की है कि चीन अपने सबसे बड़े पड़ोसी देश के साथ सीमा विवाद को जिंदा रखना चाहता है। होम्स ने कहा, यदि चीन समुद्री क्षेत्रों में आक्रामकता दिखाना चाहता है तो उसे अपनी जमीनी सीमाओं को इतना सुरक्षित कर लेना चाहिए कि जब उसे अपने पड़ोसियों की ओर दिखाई जाने वाली जमीनी आक्रामकता की चिंता न करनी पड़े। होम्स ने कहा, लागत और लाभ की कसौटी पर देखा जाए तो हिमालय में भारत के साथ बैर रखना तर्कसंगत नहीं है। अमरीका के इस मसले पर इतने समय तक चुप रहने पर उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रशासन के पास इस समय करने को बहुत कुछ है। उन्होंने कहा, यह भी संभव है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके सलाहकार इस विवाद में अमरीका को शामिल न करना चाहते हों। यदि विवाद बढ़ता है तो संभावना है कि अमरीका नई दिल्ली के समर्थन में आगे आएगा।



धरातल का सत्य भी यही है कि भारत अब विश्व स्तर पर सैनिक ही नहीं बल्कि राजनीतिक व आर्थिक स्तर पर अपनी विशेष पहचान बना चुका है। विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश होने के साथ-साथ भारत के विश्व के सबसे मजबूत लोकतांत्रिक देश अमरीका से भी अच्छे संबंध हैं। भारत और अमरीका मिलकर विश्व की राजनीतिक ही नहीं आर्थिक व सैनिक क्षेत्र को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।

विश्व में चीन को आबादी की दृष्टि के साथ-साथ सैनिक व आर्थिक दृष्टि से एक बड़े देश के रूप में देखा जाता है लेकिन चीन यह भी भूल रहा है कि भारत इसका पड़ोसी देश तो है ही साथ में वह भी जनसंख्या, सेना और आर्थिक दृष्टि से विश्व में एक विशेष पहचान रखता है और भारत की छवि और साख बारे तो अब अमरीका के बुद्धिजीवी भी यह कहने लगे हैं कि भारत एक परिपक्व देश है। भारत की परिपक्वता तो इसी बात से जाहिर हो जाती है कि वह चीन द्वारा दी जा रही धमकियों को बड़े धैर्य से सुन रहा है और बड़ी नपी तुली जुबान में जवाब भी दे रहा है। चीन की परेशानी का मूल कारण यह है कि वह जमीनी हकीकत को पहचानने व मानने को तैयार नहीं है। वह समय के साथ आ रहे परिवर्तन, विशेषतया भारत की मजबूत होती स्थिति, को स्वीकार करने को तैयार नहीं। भारत को घेरने के लिए उसने भारत के पड़ोसी देशों पाकिस्तान, नेपाल, अफगानिस्तान, श्रीलंका इत्यादि में अपना निवेश बढ़ाया है। भारत ने चीन की चाल को समझते हुए विश्व स्तर पर अमरीका, जापान आस्ट्रेलिया तथा चीन से खफा देशों से अपना तालमेल बढ़ा लिया है और अपने बाजारों के द्वार चीन के लिए भी खुले रखें। चीन की आर्थिक निर्भरता भारत पर बढ़ती जा रही है। भारत उपरोक्त तथ्यों को सामने रख अपनी रणनीति बनाता चला गया और उसी को देख आज अमरीका जैसा देश भारत को एक परिपक्व देश कह रहा है। आजादी के 70 वर्ष बाद भारत सही अर्थों में एक परिपक्व देश कहा जा सकता है, क्योंकि भारत ने पिछले समय में जिस तरह नोटबंदी की तथा वस्तु एवं सेवा कर लगाया और अब भ्रष्टाचार मुक्त तथा एक स्वच्छ भारत के लिए कार्य कर रहा है उससे भारत की परिपक्वता ही झलकती है।

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