दिल्ली स्कूल रेप: मासूम बोली, अकंल गंदे हैं मैं कभी स्कूल नहीं जाऊंगी - YOUTH DARPAN
दिल्ली स्कूल रेप: मासूम बोली, अकंल गंदे हैं मैं कभी स्कूल नहीं जाऊंगी

दिल्ली स्कूल रेप: मासूम बोली, अकंल गंदे हैं मैं कभी स्कूल नहीं जाऊंगी

देश में दिन प्रतिदिन नाबालिकों के साथ रेप की घटनाएं सामने आ रही है। हाल ही में दिल्ली में भी नाबालिक के साथ रेप का मामला सामना आया था। दिल्ली के गांधीनगर इलाके में स्थित टैगोर पब्लिक स्कूल में एक पांच साल की मासूम बच्ची को स्कूल में ही काम करने वाले एक चपरासी ने अपनी हवस का शिकार बनाया। इस हादसे के कारण बच्ची पूरी तरह से सहमी हुई है स्कूल का नाम लेने पर ही वह कांपने लगती है। बच्ची के पिता ने कहा कि शनिवार को जब बच्ची स्कूल से घर लौटी तो वह बहुत शांत थी और उसने लंच भी नहीं किया। वह सीधे बाथरुम में चली गई। बाथरुम में जाकर वह खून लगे कपड़े को बार-बार धोने लगी। जब पिता ने यह करते देखा तो उन्हें कुछ अजीब लगा उन्होंने जब बच्ची से पूछा तो बच्ची ने बलात्कार की बात बताई।

रविवार को पूरे दिन वो अपनी मां से कहती रही- अंकल गंदे हैं, मम्‍मी मुझे अब कभी स्‍कूल नहीं जाना। बता दें कि आरोपी बच्ची के स्कूल में पिछले तीन साल से गार्ड और चपरासी का काम कर रहा था। आरोपी विकास को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी के पास खून से सने कपड़े भी बरामद किये है। बच्ची के परिजन स्कूल प्रशासन व प्रिंसिपल के खिलाफ सख्त कारवाई की मांग कर रहे है। जानकारी के अनुसार दिल्ली सरकार ने सोमवार को एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है जिसमें शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया, शिक्षा विभाग, दिल्ली पुलिस के अधिकरी, निगम के आयुक्त और कुछ निजी स्कूलों के अधिकारी होंगे। दिल्ली के सभी सरकारी, निजी और नगर निगम के स्कूलों का सिक्योरिटी ऑडिट होगा। स्कूलों में सुरक्षा के गाइडलाइंस जारी किए जाएंगे। इससे पहले दिल्ली सरकार ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए हैं। सरकार ने तीन दिन के भीतर पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है।

मरने के बाद भी धड़क रहा है 14 महीने के बच्चे का दिल

14 माह का बच्चा खुद तो मर गया लेकिन उसका दिल आज भी धड़क रहा है। बच्चे का नाम सोमनाथ शाह है। 2 सितंबर को सोमनाथ अपने घर में खेलते वक्त सीढिय़ों से गिर गया। इस हादसे में उसके सिर में गंभीर चोट लगी और उसे 4 सितंबर को उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने शहर के एक एनजीओ ‘डोनेट लाइफ’ से संपर्क किया। उन लोगों ने सोमनाथ के माता पिता को ऑर्गन डोनेशन के लिए प्रेरित किया। पिता की सहमति के बाद बच्चे की मौत के बाद उसके दिल को मुंबई ले जाकर 4 साल की बच्ची आराध्या योगेश को लगा दिया गया जोकि कार्डियोमायोपथी से पीडि़त थी। इस बीमारी से हार्ट औसतन कम ही काम करता है। आराध्या का दिल भी 20 प्रतिशत काम कर रहा था। उसके साइज का हार्ट न मिल पाने के कारण सोशल मीडिया पर भी ‘सेव आराध्या’ नाम से कैंपेन चला।

हार्ट ट्रंसप्लांट के लिए आराध्या की सर्जरी फोर्टिस अस्पताल, मुंबई के मुख्य कार्डिएक सर्जन डॉ. अन्वय ने की। उन्होंने बताया कि ट्रांसप्लांट के लिए एक छोटे साइज का हार्ट मिलने में काफी मुश्किल हो रही थी, लेकिन उसकी जिंदगी बचाने के लिए नन्हें डोनर सोमनाथ का शुक्रिया।’ सोमनाथ के पिता ने बताया कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने बेटा पाने के लिए काफी दुआएं की थीं। पिछले साल हमारी दुआ कबूल हो गई, लेकिन हमें नहीं पता था कि वह हमें इतनी जल्दी छोड़कर चला जाएगा। हमने बेटे को खो दिया तो क्या हुआ, वह अब भी आराध्या के अंदर जीवित है। उसके अंतिम संस्कार के बाद हम बच्ची से मिलने मुंबई जाएंगे।’

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Founder and CEO, Trilok Singh. MA. POL.SCI (2015-17). CEO/Owner at IASmind.com

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